कब तेरे हक़ से इनकार रहा है मौत

कब तेरे हक़ से इनकार रहा है मौत
जो वक़्त मुझे मिला बस उसमे दख्ल ना दे

जी
चुका में बहोत सोच सोच के
बेखुदी में हूँ अब मुझे कोई अक्ल ना दे

राह में मिलें हैं एक अनजान की तरह
बेनाम ही बेहतर रिश्ते को कोई शक्ल ना दे

- باليۤ Bali

मैं अब आगे बाद रहा हूँ

मैं अपने अतीत से लड़ रहा हूँ
बहोत हुआ, मैं अब आगे बाद रहा हूँ

वो गर बदगुमान भी रहा तो मंजूर था
ठोकरों ही से मैं अब सम्हल रहा हूँ

- باليۤ Bali

वही बेआशना हुआ

वक़्त यूँ भी हमपे गुज़रा है कभी
जिसपे हम मारा किए वही बेआशना हुआ

- باليۤ Bali

ऐ वक़्त, तेरी भी अजब रफ़्तार रही ता-उम्र

दिल थमा तो तू थमा, वो गुज़रे तो तू गुरेज़ा हुआ
वक़्त, तेरी भी अजब रफ़्तार रही ता-उम्र

- باليۤ Bali

वजूद मेरे होने की तस्दीक़ करता है

हर एक दिन यूँ चला आता है रोज़ अकेला
ज्यों वजूद मेरे होने की तस्दीक़ करता है

- باليۤ Bali

के ख़ुद का होना भी एक भीड़ सा लगता है

हैं अकेले आजकल हम इस कदर
के ख़ुद का होना भी एक भीड़ सा लगता है

- باليۤ Bali

पसे आइना कोई नही

मुर्रव्वत यूँ जुदा कर गई मेरे वजूद को मुझ से
एक अजनबी है सरे आइना, पसे आइना कोई नही

- باليۤ Bali

माजी के कुछ अनमिटे निशाँ हैं सीने पे

एक खला, तेरे कुछ गुल और कफ़न है सीने पे
माजी के कुछ अनमिटे निशाँ हैं सीने पे

- باليۤ Bali

नज़र हम भी रखते हैं

आप गर मिजाज़ अपना ना भी कहें
एक अदद नज़र हम भी रखते हैं

- باليۤ Bali

कोई तो है जिसका इंतज़ार है

बेहिसी बेसबब नही दिल
कोई तो है जिसका इंतज़ार है

- باليۤ Bali

मुझे यकीं भी नही

इतनी बढ़ गई थी हसरत--दीदार दिल में
तस्वीर उसकी है और मुझे यकीं भी नही

एक अरसा जो बीता है फिराक़ में
तू सामने है और मुझे यकीं भी नही

- باليۤ Bali

दर्द-ए-दिल ही अकेला दर्द नही

वजह और भी हैं जीने की बाली
दर्द--दिल ही अकेला दर्द नही

- باليۤ Bali

जुस्तजू फकत तेरी बाकी रही

वजूद के मेरे मिटते मिटते
जुस्तजू फकत तेरी बाकी रही

- باليۤ Bali

कहाँ पहुंचाता है जुनूं

कोशिश एक अरसे से है
देखें कहाँ पहुंचाता है जुनूं

- باليۤ Bali

मैं बेजुबान ही हूँ तो बेहतर

मैं बेजुबान ही हूँ तो बेहतर था
तेरे सितम पे कोई आह तो ना होती

- باليۤ Bali

वो तमन्ना कहाँ गई?

हिज्र में एक दहकता सा मलाल था दिल में
अब के तू मिला तो वो तमन्ना कहाँ गई?

- باليۤ Bali

आब आईने में

एक मिराज सा ही है आब आईने में
तस्वीर से तेरी दिल और दुखे जाता है

- باليۤ Bali

एक दस्तूर था तेरा इंतज़ार

कोई उम्मीद नही कोई वादा यकीं भी नही
एक दस्तूर था तेरा इंतज़ार सो मैं करता रहा

- باليۤ Bali

हँसता था वो कभी

यूँ तो एक जिन्दा लाश ही था बाली
अफवाह ही होगी के हँसता था वो कभी

- باليۤ Bali

कब किसी और ने भी दर्द दिया है दिल?

कब किसी और ने भी दर्द दिया है दिल?
ये तेरे ख्वाब ही हैं जो जलाये जाते हैं

- باليۤ Bali

ज़माने की राह पे

फासला इतना भी ना था दिलों के दरम्यान
तुम ही कहीं ज़माने की राह पे तो नही

- باليۤ Bali

तुम यूँ भी एक फासला बनाये हो


तुम यूँ भी एक फासला बनाये हो
उसपे दिल ये कहता है के मैं कौन हूँ

- باليۤ Bali

हंसना, मुस्कुराना, लोगों से मिलना


हंसना, मुस्कुराना, लोगों से मिलना, ये ही रोज़गार है
हद-ऐ-ग़म जब से हुई है पार, ये ही एख्त्यार है

- باليۤ Bali

तेरा याद आना याद आता है


रह रह के तेरा याद आना याद आता है
क्या हुआ के तुझे मेरा होना भी याद नही

- باليۤ Bali

किसी उफक की तरह


कहीं किसी आसमा के परे किसी उफक की तरह
जिंदगी देती रही धोका क्यों हर मोड़ पे मुझ


- باليۤ Bali

बात तो यही थी की कहने को कोई बात न थी

.

हो सकता गर बयां हर दर्द तो बात क्या थी
बात तो यही थी की कहने को कोई बात न थी

रह रहे अनजान हम भी, बेगाने तुम भी
हो ही जाती गर कोई बात तो बात क्या थी

किस्मत लाज़िम नही हर बार दस्तक दे के आए
लौट ही जाए गर वो तो कहिये बात क्या थी

कहते तो रहे वो के क्यों करें हम तुमसे बात
उंगलियाँ जो करती रहीं बयां पर वो बात क्या थी


- باليۤ Bali

दिल दिलासा देता है के में जिन्दा हूँ

तुने अरसा हुआ मेरा हाल पूछे को
अब दिल दिलासा देता है के में जिन्दा हूँ


- باليۤ Bali

तेरी बेरुकी को और कहाँ दिल पे लें

हम को हम से ही हैं बहुत शिकवे ऐ जिंदगी
तेरी बेरुकी को और कहाँ दिल पे लें

- باليۤ Bali

जिंदगी सूरत तेरी और होती

गरचे जिंदगी सूरत तेरी और होती
मैं कोई और होता, तू कोई और होती

यूँ ही निकल गई उम्र सोचने में
तू अगर होती तो किस्मत मेरी और होती

हालात तो बहोत थे सुधारने को
वज़ह मयस्सर तेरे होने की और होती

रह रह के दिल जिसे याद करता है
तू नही होती तो कोई और होती


- باليۤ Bali

कौन सुनता अश्कों का छलकना

ज़िंदगी तेरे ख्वाब अब बहोत हुए |
हमने भी सुना है जागना क्या है ||


कौन सुनता अश्कों का छलकना |
पानी अब मुस्कान बनके उतरा है ||


- باليۤ Bali

रहजन हो चले

रहजन हो चले इंतज़ार में किसी के
क्या हो की उसने रस्ता बदल लिया हो

रिस रहा है लहू रगों से ज़रा ज़रा

.

ज़िंदगी और अनजान हुई तजरुबों से ज़रा ज़रा
खोता रहा मैं कितने नामों से ज़रा ज़रा

आहें खो रही हैं नकली मुस्कानों में
रिस रहा है लहू रगों से ज़रा ज़रा

हो चला हूँ ख़ुद से पराया आजकल
मिलने लगा हूँ लोगों से ज़रा ज़रा

अक्स मेरा बह गया कितनी अफवाहों में
पहचाना जाता हूँ रंगों से ज़रा ज़रा

रोकते हैं दस्त-ओ-पा तेरे कूचे से
बचने लगा हूँ तेरे ख्वाबों से ज़रा ज़रा

कोई तो इन्सां होगा मुझ में भी
क्यों मैं डरने लगा सवाबों से ज़रा ज़रा

तेरे इंतज़ार में ना जुज़-कलम रही 'बाली'
कहकहे निकलते रहे ज़ख्मों से ज़रा ज़रा



زندگئ اور انجان ہوئ تظربوں سے زرا زرا
کھتا رہا میں کتنے ناموں سے زرا زرا

آہیں کھہ رھئ ہیں نکلئ مسکانو میں
رس رہا ہے لھوُ رگوں سے زرا زرا

ہو چلا ہوں کھد سے پراعا آجکل
ملنے لگہ ہوں لوگوں سے زرا زرا

اقش میرا بح گعا کتنی افواہوں میں
پہچانا جاتا ہوں رںگوں سے زرا زرا

روکتے ہیں دست و پا تیرے کوچے سے
بچنے لگا ہوں ترے کھوابوں سے زرا زرا

کوئ تو انشاں ہوگا مجھ میں بھی
کیوں میں درنے لگا سوابوں سے زرا زرا

ترے انتظار میں نا جُز-کلم رھئ بالی
کہکہے نکلتے رھے ضکھموں سے زرا زرا



- باليۤ Bali

उसकी तोहमतें

यूं तो उसकी तोहमतें हज़ार थीं
हम थे की नज़रें निसार थीं

یوں تو ُاسکئ تہمتیں ہزار تھیں
ہم تھے کے نزریں نسار تھیں


- باليۤ Bali

हाथ उठा अलविदा को, के बुलाने को

गुबार-ऑ-रह ने देखने ही ना दिया
तेरा हाथ उठा अलविदा को, के बुलाने को

غبار و راہ نے دےکھنے ہی ن دیا
تیرا ہاتھ وتھا تھا الویدا کہ کے بولانے کہ


- باليۤ Bali

तनहाइयां मेरी जाने कहाँ खो गई

तनहा सा फिरता हूँ मशरुफिय्तों में |
तनहाइयां मेरी जाने कहाँ खो गई ||
- باليۤ Bali

सबब उनके बिछड़ने का

सबब उनके भी बिछड़ने का होगा कोई |
सुना है दूरियां खुलूस लाती हैं ||
- باليۤ Bali

सब्र की इन्तेहाँ देखनी है

करते हो इनकार तुम भी सनम कब तक |
हमें भी अपने सब्र की इन्तेहाँ देखनी है ||
- باليۤ Bali

वो करता है ज़ाहिर अदावत

रह के खामोश वो करता है ज़ाहिर अदावत |
रह के खामोश सब्र मेरा इन्तेहान देता है ||
- باليۤ Bali

कोई कासिद चारासाज़ तक पहुँचता

मर्ज़ का मेरे जमाने भर में है चर्चा |
काश कोई कासिद चारासाज़ तक पहुँचता ||

- باليۤ Bali
उसने नज़र की, ये क्या कम है
फ़िर वो गिरियाँ सही, ये क्या कम है
- باليۤ Bali

उनसे परदा

अब परदा उनसे भी है
इंतज़ार जिनका शब भर किया
- باليۤ Bali

आह का वजूद

आह ख़ुद अपना वजूद आप रखतीं हैं
पेश-ऐ-नज़र ना भी हो, असर रखतीं हैं

दिल में कितनी भी हो कसक इन्सां फ़िर भी
अश्र पे वो हैं जो दिल-ओ-माद्दा रखतीं हैं

- باليۤ Bali

हादसों से गुज़रा हूँ

मत पूछ कितने हादसों से गुज़रा हूँ
जब तेरे घर के रास्तों से गुज़रा हूँ

गुज़रना यूं भी कम ना था दिल से तेरा
तुझे जो भुलाने की बेहिस कोशिशों से गुज़रा हूँ

- باليۤ Bali

आशना हो जाए

हम तो चाहते हैं की गैर भी आशना हो जाए
आप दोस्त हो के अदावत करते हैं

- باليۤ Bali

तेरा इंतज़ार

तेरा इंतज़ार . . . .

झड़ती ज़िंदगी . . . . . उगते दिन,

पिघलता सूरज . . . . . . घुटती रातें,

तेरा इंतज़ार

दौड़ता दिल . . . . . . . . . थमता मन,

बोझिल पाँव . . . . . . . फैली आँखें,

तेरा इंतज़ार

बिखरी आस्था . . . . . . . सिमटी आशाएं,

अधमरे संकल्प . . . . . गुमराह विचार,

तेरा इंतज़ार


- باليۤ Bali

आप आस पास हैं

आदाब ना ही करें आप वक़्त-ए-रुकसत को |
हम ये वहम किये रहेंगे आप आस पास हैं ||

दर्द का सिला जहाँ दिया जाता है दर्द

याद दिल की दिला जाता है दर्द |
अब तो खुद दावा बना जाता है दर्द ||

पानी की तरह जिसे बहा देते हैं चश्म |
दिल के गहरे में उसे कहा जाता है दर्द ||

ता-उफाक जिसे ढूँढती थी नज़रें |
देख के उसे ही ना जाने क्यों बढ़ा जाता है दर्द ||

हम जैसे मयकशों की तो ज़िन्दगी है |
ज़बां-ए-वाइज़ में जिसे कहा जाता है दर्द ||

और 'बाली' उल्फत है नाम किसका ?
दर्द का सिला जहाँ दिया जाता है दर्द ||

- باليۤ Bali

आग ढूँढते हैं

दिल में छिपी कोई आग ढूँढते हैं |
रोना चाहते हैं, तेरी याद ढूँढते हैं |

कैसे हैं वो जिनके सफर तमाम हुए ?
हम तो मंजिलें मंजिलों के बाद ढूँढते हैं |

सुना है दवा काम नहीं करती आजकल |
आखरी वक़्त है, फरियाद ढूँढते हैं |

बहोत हो इन्साँ खुद से हो वाकिफ़ |
आँखें मूंदें हैं, चिराग ढूँढते हैं |

किसी हमराज़ की तालाश है हमें |
आइना करने को बात बात ढूँढते हैं |

राहते रास नहीं आई इन्साँ को 'बाली' |
देखिये चमन-ए-कशमीर मई फसाद ढूँढते हैं ||

- باليۤ Bali

कोई शिकवा

कोई शिकवा आप हम से भी करें |
एक अरसा हुआ बात हम से भी करें ||

- باليۤ Bali

तेरा इंतज़ार

जानते हैं वस्ल में है लुत्फ़ बहोत !
तेरे इंतज़ार का भी लेकिन कोई सानी नहीं !!

- باليۤ Bali

फिर आ गयी वो रुत

फिर आ गयी वो रुत तेरे याद आने की
फिर आ गयी वो रुत आंसूं बहाने की

हर रोज़ देखते हैं तारों में तेरी सूरत
फिर आ गयी वो रुत रातें जगाने की

राहों में ढूँढते हैं निशां बीते दिनों के
फिर आ गयी वो रुत ठोकरें खाने की

आज फिर ख़ुशी गम बन के लौटी है
फिर आ गयी वो रुत गीत गाने की

सब पत्ते झड़ गए तो क्या 'बाली'
फिर आ गयी वो रुत नयी कोपलें आने की

- باليۤ Bali

- - एक टुकड़ा वक़्त - -

औराक़ पलटोगे गर माझी-ए-ज़िन्दगी के ,

किसी में सूखे गुलाब तो,
किसी में अश्कों के निशाँ होंगे |

अल्फाज़ एक-एक दर्द को ज़िंदा कर देंगे,
सामने आ खड़े होंगे गुज़रे चहरे सारे ||

एक सिद्दत सी उठेगी लौट जाने की |
फासला कुछ तो ना होगा तेरे और माझी के बीच,
फ़क़त जबल-ए-वक़्त--गुरेजां दरम्यान होंगे |

क्यों फिर तू बारह चाहता है लौटना 'बाली',
जबकि हर मुस्तक्बिल का मुस्तक्बिल है माझी होना ||

हर ज़िन्दगी के मानी, एक टुकड़ा वक़्त में अयां होंगे |||

- باليۤ Bali

तुझे पता है ?

तुझे पता है, तेरा इंतज़ार तुझ से ज़्यादा हसीं है ?
तुझे पता है, जब तू नहीं होता तो तेरे ख़्याल मुझ से बातें करते हैं ?
तुझे पता है, तेरी आँखों का झुकना तेरे होटों से ज़्यादा बोल जाता है ?
तुझे पता है, तेरी सवाल पूछने की अदा ही हर जवाब है मेरे लिए ?
तुझे पता है, तेरे हंसते हुए बिखर जाना ही मेरे लिए ज़िन्दगी का हासिल है ???

अगर तुझे कुछ भी पता है तेरे बारे में, तो तू जानता है की क्या है तू मेरे लिए !!!

- باليۤ Bali

जिन्दगी माया !

जिन्दगी माया ! जिन्दगी माया !

हासिल है क्या ? माया !
जो छुट गया ! माया !

हम तुझे कुछ कह ना सके !
कह भी दिया तो क्या ? माया !

आरज़ू है, ज़ुस्त्जू है !
आइना है, अक्स भी !
दरम्यां पर फासला है !
आता नज़र क्या? माया !

टूटती है हर नज़र क्यों ?
जुड़ रही है ये ख़लिश क्यों ?
दिल के गहरे में क्या! माया !

दिल के गहरे में एक साया! माया !

- باليۤ Bali

खामोशियों का रिश्ता

खामोशियों का जब उसने हमसे रिश्ता बना दिया |
देखिए क्या थे हम और क्या बना दिया ||

हम तो खड़े थे तेरी नज़रों के दरम्यां |
वक़्त ने ना जाने कब फासला बाना दिया ||

और भी होंगी मंजिले राहों में तेरी हज़ार |
इस मकां को तुने हमराह रास्ता बाना दिया ||

मुद्दत बाद वो मिलते हैं तो कहते हैं 'बाली' |
हमने क्या छोड़ा था गम ने क्या बाना दिया ||

- باليۤ Bali

औरों के दर्द-ओ-बयाँ

औरों के दर्द-ओ-बयाँ पे फब्ते कसे थे हमने
जब दिल पे चोट लगी तो अहसास हुआ
- बाली

اوروں کے درد او بياں پے فبتے کسے تھے همنے
جب دل پے چوٹ لگي تو احساس هوا
۔ باليۤ