कब तेरे हक़ से इनकार रहा है मौत
जो वक़्त मुझे मिला बस उसमे दख्ल ना दे
जी चुका में बहोत सोच सोच के
बेखुदी में हूँ अब मुझे कोई अक्ल ना दे
राह में मिलें हैं एक अनजान की तरह
बेनाम ही बेहतर रिश्ते को कोई शक्ल ना दे
- باليۤ Bali
मैं अब आगे बाद रहा हूँ
मैं अपने अतीत से लड़ रहा हूँ
बहोत हुआ, मैं अब आगे बाद रहा हूँ
वो गर बदगुमान भी रहा तो मंजूर था
ठोकरों ही से मैं अब सम्हल रहा हूँ
- باليۤ Bali
बहोत हुआ, मैं अब आगे बाद रहा हूँ
वो गर बदगुमान भी रहा तो मंजूर था
ठोकरों ही से मैं अब सम्हल रहा हूँ
- باليۤ Bali
ऐ वक़्त, तेरी भी अजब रफ़्तार रही ता-उम्र
दिल थमा तो तू थमा, वो गुज़रे तो तू गुरेज़ा हुआ
ऐ वक़्त, तेरी भी अजब रफ़्तार रही ता-उम्र
- باليۤ Bali
ऐ वक़्त, तेरी भी अजब रफ़्तार रही ता-उम्र
- باليۤ Bali
वजूद मेरे होने की तस्दीक़ करता है
हर एक दिन यूँ चला आता है रोज़ अकेला
ज्यों वजूद मेरे होने की तस्दीक़ करता है
- باليۤ Bali
ज्यों वजूद मेरे होने की तस्दीक़ करता है
- باليۤ Bali
के ख़ुद का होना भी एक भीड़ सा लगता है
हैं अकेले आजकल हम इस कदर
के ख़ुद का होना भी एक भीड़ सा लगता है
- باليۤ Bali
के ख़ुद का होना भी एक भीड़ सा लगता है
- باليۤ Bali
पसे आइना कोई नही
मुर्रव्वत यूँ जुदा कर गई मेरे वजूद को मुझ से
एक अजनबी है सरे आइना, पसे आइना कोई नही
- باليۤ Bali
एक अजनबी है सरे आइना, पसे आइना कोई नही
- باليۤ Bali
माजी के कुछ अनमिटे निशाँ हैं सीने पे
एक खला, तेरे कुछ गुल और कफ़न है सीने पे
माजी के कुछ अनमिटे निशाँ हैं सीने पे
- باليۤ Bali
माजी के कुछ अनमिटे निशाँ हैं सीने पे
- باليۤ Bali
मुझे यकीं भी नही
इतनी बढ़ गई थी हसरत-ए-दीदार दिल में
तस्वीर उसकी है और मुझे यकीं भी नही
एक अरसा जो बीता है फिराक़ में
तू सामने है और मुझे यकीं भी नही
- باليۤ Bali
तस्वीर उसकी है और मुझे यकीं भी नही
एक अरसा जो बीता है फिराक़ में
तू सामने है और मुझे यकीं भी नही
- باليۤ Bali
मैं बेजुबान ही हूँ तो बेहतर
मैं बेजुबान ही हूँ तो बेहतर था
तेरे सितम पे कोई आह तो ना होती
- باليۤ Bali
तेरे सितम पे कोई आह तो ना होती
- باليۤ Bali
वो तमन्ना कहाँ गई?
हिज्र में एक दहकता सा मलाल था दिल में
अब के तू मिला तो वो तमन्ना कहाँ गई?
- باليۤ Bali
अब के तू मिला तो वो तमन्ना कहाँ गई?
- باليۤ Bali
एक दस्तूर था तेरा इंतज़ार
कोई उम्मीद नही कोई वादा ओ यकीं भी नही
एक दस्तूर था तेरा इंतज़ार सो मैं करता रहा
- باليۤ Bali
एक दस्तूर था तेरा इंतज़ार सो मैं करता रहा
- باليۤ Bali
कब किसी और ने भी दर्द दिया है दिल?
कब किसी और ने भी दर्द दिया है दिल?
ये तेरे ख्वाब ही हैं जो जलाये जाते हैं
- باليۤ Bali
ये तेरे ख्वाब ही हैं जो जलाये जाते हैं
- باليۤ Bali
ज़माने की राह पे
फासला इतना भी ना था दिलों के दरम्यान
तुम ही कहीं ज़माने की राह पे तो नही
- باليۤ Bali
तुम ही कहीं ज़माने की राह पे तो नही
- باليۤ Bali
तुम यूँ भी एक फासला बनाये हो
तुम यूँ भी एक फासला बनाये हो
उसपे दिल ये कहता है के मैं कौन हूँ
- باليۤ Bali
हंसना, मुस्कुराना, लोगों से मिलना
हंसना, मुस्कुराना, लोगों से मिलना, ये ही रोज़गार है
हद-ऐ-ग़म जब से हुई है पार, ये ही एख्त्यार है
- باليۤ Bali
- باليۤ Bali
तेरा याद आना याद आता है
रह रह के तेरा याद आना याद आता है
क्या हुआ के तुझे मेरा होना भी याद नही
किसी उफक की तरह
कहीं किसी आसमा के परे किसी उफक की तरह
जिंदगी देती रही धोका क्यों हर मोड़ पे मुझ
बात तो यही थी की कहने को कोई बात न थी
.
हो सकता गर बयां हर दर्द तो बात क्या थी
बात तो यही थी की कहने को कोई बात न थी
रह रहे अनजान हम भी, बेगाने तुम भी
हो ही जाती गर कोई बात तो बात क्या थी
किस्मत लाज़िम नही हर बार दस्तक दे के आए
लौट ही जाए गर वो तो कहिये बात क्या थी
कहते तो रहे वो के क्यों करें हम तुमसे बात
उंगलियाँ जो करती रहीं बयां पर वो बात क्या थी
- باليۤ Bali
हो सकता गर बयां हर दर्द तो बात क्या थी
बात तो यही थी की कहने को कोई बात न थी
रह रहे अनजान हम भी, बेगाने तुम भी
हो ही जाती गर कोई बात तो बात क्या थी
किस्मत लाज़िम नही हर बार दस्तक दे के आए
लौट ही जाए गर वो तो कहिये बात क्या थी
कहते तो रहे वो के क्यों करें हम तुमसे बात
उंगलियाँ जो करती रहीं बयां पर वो बात क्या थी
- باليۤ Bali
दिल दिलासा देता है के में जिन्दा हूँ
तुने अरसा हुआ मेरा हाल पूछे को
अब दिल दिलासा देता है के में जिन्दा हूँ
- باليۤ Bali
अब दिल दिलासा देता है के में जिन्दा हूँ
- باليۤ Bali
तेरी बेरुकी को और कहाँ दिल पे लें
हम को हम से ही हैं बहुत शिकवे ऐ जिंदगी
तेरी बेरुकी को और कहाँ दिल पे लें
- باليۤ Bali
तेरी बेरुकी को और कहाँ दिल पे लें
- باليۤ Bali
जिंदगी सूरत तेरी और होती
गरचे जिंदगी सूरत तेरी और होती
मैं कोई और होता, तू कोई और होती
यूँ ही निकल गई उम्र सोचने में
तू अगर होती तो किस्मत मेरी और होती
हालात तो बहोत थे सुधारने को
वज़ह मयस्सर तेरे होने की और होती
रह रह के दिल जिसे याद करता है
तू नही होती तो कोई और होती
- باليۤ Bali
मैं कोई और होता, तू कोई और होती
यूँ ही निकल गई उम्र सोचने में
तू अगर होती तो किस्मत मेरी और होती
हालात तो बहोत थे सुधारने को
वज़ह मयस्सर तेरे होने की और होती
रह रह के दिल जिसे याद करता है
तू नही होती तो कोई और होती
- باليۤ Bali
कौन सुनता अश्कों का छलकना
ज़िंदगी तेरे ख्वाब अब बहोत हुए |
हमने भी सुना है जागना क्या है ||
कौन सुनता अश्कों का छलकना |
पानी अब मुस्कान बनके उतरा है ||
- باليۤ Bali
हमने भी सुना है जागना क्या है ||
कौन सुनता अश्कों का छलकना |
पानी अब मुस्कान बनके उतरा है ||
- باليۤ Bali
रिस रहा है लहू रगों से ज़रा ज़रा
.
ज़िंदगी और अनजान हुई तजरुबों से ज़रा ज़रा
खोता रहा मैं कितने नामों से ज़रा ज़रा
आहें खो रही हैं नकली मुस्कानों में
रिस रहा है लहू रगों से ज़रा ज़रा
हो चला हूँ ख़ुद से पराया आजकल
मिलने लगा हूँ लोगों से ज़रा ज़रा
अक्स मेरा बह गया कितनी अफवाहों में
पहचाना जाता हूँ रंगों से ज़रा ज़रा
रोकते हैं दस्त-ओ-पा तेरे कूचे से
बचने लगा हूँ तेरे ख्वाबों से ज़रा ज़रा
कोई तो इन्सां होगा मुझ में भी
क्यों मैं डरने लगा सवाबों से ज़रा ज़रा
तेरे इंतज़ार में ना जुज़-कलम रही 'बाली'
कहकहे निकलते रहे ज़ख्मों से ज़रा ज़रा
زندگئ اور انجان ہوئ تظربوں سے زرا زرا
کھتا رہا میں کتنے ناموں سے زرا زرا
آہیں کھہ رھئ ہیں نکلئ مسکانو میں
رس رہا ہے لھوُ رگوں سے زرا زرا
ہو چلا ہوں کھد سے پراعا آجکل
ملنے لگہ ہوں لوگوں سے زرا زرا
اقش میرا بح گعا کتنی افواہوں میں
پہچانا جاتا ہوں رںگوں سے زرا زرا
روکتے ہیں دست و پا تیرے کوچے سے
بچنے لگا ہوں ترے کھوابوں سے زرا زرا
کوئ تو انشاں ہوگا مجھ میں بھی
کیوں میں درنے لگا سوابوں سے زرا زرا
ترے انتظار میں نا جُز-کلم رھئ بالی
کہکہے نکلتے رھے ضکھموں سے زرا زرا
- باليۤ Bali
ज़िंदगी और अनजान हुई तजरुबों से ज़रा ज़रा
खोता रहा मैं कितने नामों से ज़रा ज़रा
आहें खो रही हैं नकली मुस्कानों में
रिस रहा है लहू रगों से ज़रा ज़रा
हो चला हूँ ख़ुद से पराया आजकल
मिलने लगा हूँ लोगों से ज़रा ज़रा
अक्स मेरा बह गया कितनी अफवाहों में
पहचाना जाता हूँ रंगों से ज़रा ज़रा
रोकते हैं दस्त-ओ-पा तेरे कूचे से
बचने लगा हूँ तेरे ख्वाबों से ज़रा ज़रा
कोई तो इन्सां होगा मुझ में भी
क्यों मैं डरने लगा सवाबों से ज़रा ज़रा
तेरे इंतज़ार में ना जुज़-कलम रही 'बाली'
कहकहे निकलते रहे ज़ख्मों से ज़रा ज़रा
زندگئ اور انجان ہوئ تظربوں سے زرا زرا
کھتا رہا میں کتنے ناموں سے زرا زرا
آہیں کھہ رھئ ہیں نکلئ مسکانو میں
رس رہا ہے لھوُ رگوں سے زرا زرا
ہو چلا ہوں کھد سے پراعا آجکل
ملنے لگہ ہوں لوگوں سے زرا زرا
اقش میرا بح گعا کتنی افواہوں میں
پہچانا جاتا ہوں رںگوں سے زرا زرا
روکتے ہیں دست و پا تیرے کوچے سے
بچنے لگا ہوں ترے کھوابوں سے زرا زرا
کوئ تو انشاں ہوگا مجھ میں بھی
کیوں میں درنے لگا سوابوں سے زرا زرا
ترے انتظار میں نا جُز-کلم رھئ بالی
کہکہے نکلتے رھے ضکھموں سے زرا زرا
- باليۤ Bali
उसकी तोहमतें
यूं तो उसकी तोहमतें हज़ार थीं
हम थे की नज़रें निसार थीं
یوں تو ُاسکئ تہمتیں ہزار تھیں
ہم تھے کے نزریں نسار تھیں
- باليۤ Bali
हम थे की नज़रें निसार थीं
یوں تو ُاسکئ تہمتیں ہزار تھیں
ہم تھے کے نزریں نسار تھیں
- باليۤ Bali
हाथ उठा अलविदा को, के बुलाने को
गुबार-ऑ-रह ने देखने ही ना दिया
तेरा हाथ उठा अलविदा को, के बुलाने को
غبار و راہ نے دےکھنے ہی ن دیا
تیرا ہاتھ وتھا تھا الویدا کہ کے بولانے کہ
- باليۤ Bali
तेरा हाथ उठा अलविदा को, के बुलाने को
غبار و راہ نے دےکھنے ہی ن دیا
تیرا ہاتھ وتھا تھا الویدا کہ کے بولانے کہ
- باليۤ Bali
तनहाइयां मेरी जाने कहाँ खो गई
तनहा सा फिरता हूँ मशरुफिय्तों में |
तनहाइयां मेरी जाने कहाँ खो गई ||
- باليۤ Bali
तनहाइयां मेरी जाने कहाँ खो गई ||
- باليۤ Bali
सब्र की इन्तेहाँ देखनी है
करते हो इनकार तुम भी सनम कब तक |
हमें भी अपने सब्र की इन्तेहाँ देखनी है ||
- باليۤ Bali
हमें भी अपने सब्र की इन्तेहाँ देखनी है ||
- باليۤ Bali
वो करता है ज़ाहिर अदावत
रह के खामोश वो करता है ज़ाहिर अदावत |
रह के खामोश सब्र मेरा इन्तेहान देता है ||
- باليۤ Bali
रह के खामोश सब्र मेरा इन्तेहान देता है ||
- باليۤ Bali
कोई कासिद चारासाज़ तक पहुँचता
मर्ज़ का मेरे जमाने भर में है चर्चा |
काश कोई कासिद चारासाज़ तक पहुँचता ||
- باليۤ Bali
काश कोई कासिद चारासाज़ तक पहुँचता ||
- باليۤ Bali
आह का वजूद
आह ख़ुद अपना वजूद आप रखतीं हैं
पेश-ऐ-नज़र ना भी हो, असर रखतीं हैं
दिल में कितनी भी हो कसक इन्सां फ़िर भी
अश्र पे वो हैं जो दिल-ओ-माद्दा रखतीं हैं
- باليۤ Bali
पेश-ऐ-नज़र ना भी हो, असर रखतीं हैं
दिल में कितनी भी हो कसक इन्सां फ़िर भी
अश्र पे वो हैं जो दिल-ओ-माद्दा रखतीं हैं
- باليۤ Bali
हादसों से गुज़रा हूँ
मत पूछ कितने हादसों से गुज़रा हूँ
जब तेरे घर के रास्तों से गुज़रा हूँ
गुज़रना यूं भी कम ना था दिल से तेरा
तुझे जो भुलाने की बेहिस कोशिशों से गुज़रा हूँ
- باليۤ Bali
तेरा इंतज़ार
तेरा इंतज़ार . . . .
झड़ती ज़िंदगी . . . . . उगते दिन,
पिघलता सूरज . . . . . . घुटती रातें,
तेरा इंतज़ार
दौड़ता दिल . . . . . . . . . थमता मन,
बोझिल पाँव . . . . . . . फैली आँखें,
तेरा इंतज़ार
बिखरी आस्था . . . . . . . सिमटी आशाएं,
अधमरे संकल्प . . . . . गुमराह विचार,
तेरा इंतज़ार
- باليۤ Bali
दर्द का सिला जहाँ दिया जाता है दर्द
याद दिल की दिला जाता है दर्द |
अब तो खुद दावा बना जाता है दर्द ||
पानी की तरह जिसे बहा देते हैं चश्म |
दिल के गहरे में उसे कहा जाता है दर्द ||
ता-उफाक जिसे ढूँढती थी नज़रें |
देख के उसे ही ना जाने क्यों बढ़ा जाता है दर्द ||
हम जैसे मयकशों की तो ज़िन्दगी है |
ज़बां-ए-वाइज़ में जिसे कहा जाता है दर्द ||
और 'बाली' उल्फत है नाम किसका ?
दर्द का सिला जहाँ दिया जाता है दर्द ||
- باليۤ Bali
अब तो खुद दावा बना जाता है दर्द ||
पानी की तरह जिसे बहा देते हैं चश्म |
दिल के गहरे में उसे कहा जाता है दर्द ||
ता-उफाक जिसे ढूँढती थी नज़रें |
देख के उसे ही ना जाने क्यों बढ़ा जाता है दर्द ||
हम जैसे मयकशों की तो ज़िन्दगी है |
ज़बां-ए-वाइज़ में जिसे कहा जाता है दर्द ||
और 'बाली' उल्फत है नाम किसका ?
दर्द का सिला जहाँ दिया जाता है दर्द ||
- باليۤ Bali
आग ढूँढते हैं
दिल में छिपी कोई आग ढूँढते हैं |
रोना चाहते हैं, तेरी याद ढूँढते हैं |
कैसे हैं वो जिनके सफर तमाम हुए ?
हम तो मंजिलें मंजिलों के बाद ढूँढते हैं |
सुना है दवा काम नहीं करती आजकल |
आखरी वक़्त है, फरियाद ढूँढते हैं |
बहोत हो इन्साँ खुद से हो वाकिफ़ |
आँखें मूंदें हैं, चिराग ढूँढते हैं |
किसी हमराज़ की तालाश है हमें |
आइना करने को बात बात ढूँढते हैं |
राहते रास नहीं आई इन्साँ को 'बाली' |
देखिये चमन-ए-कशमीर मई फसाद ढूँढते हैं ||
- باليۤ Bali
रोना चाहते हैं, तेरी याद ढूँढते हैं |
कैसे हैं वो जिनके सफर तमाम हुए ?
हम तो मंजिलें मंजिलों के बाद ढूँढते हैं |
सुना है दवा काम नहीं करती आजकल |
आखरी वक़्त है, फरियाद ढूँढते हैं |
बहोत हो इन्साँ खुद से हो वाकिफ़ |
आँखें मूंदें हैं, चिराग ढूँढते हैं |
किसी हमराज़ की तालाश है हमें |
आइना करने को बात बात ढूँढते हैं |
राहते रास नहीं आई इन्साँ को 'बाली' |
देखिये चमन-ए-कशमीर मई फसाद ढूँढते हैं ||
- باليۤ Bali
फिर आ गयी वो रुत
फिर आ गयी वो रुत तेरे याद आने की
फिर आ गयी वो रुत आंसूं बहाने की
हर रोज़ देखते हैं तारों में तेरी सूरत
फिर आ गयी वो रुत रातें जगाने की
राहों में ढूँढते हैं निशां बीते दिनों के
फिर आ गयी वो रुत ठोकरें खाने की
आज फिर ख़ुशी गम बन के लौटी है
फिर आ गयी वो रुत गीत गाने की
सब पत्ते झड़ गए तो क्या 'बाली'
फिर आ गयी वो रुत नयी कोपलें आने की
- باليۤ Bali
फिर आ गयी वो रुत आंसूं बहाने की
हर रोज़ देखते हैं तारों में तेरी सूरत
फिर आ गयी वो रुत रातें जगाने की
राहों में ढूँढते हैं निशां बीते दिनों के
फिर आ गयी वो रुत ठोकरें खाने की
आज फिर ख़ुशी गम बन के लौटी है
फिर आ गयी वो रुत गीत गाने की
सब पत्ते झड़ गए तो क्या 'बाली'
फिर आ गयी वो रुत नयी कोपलें आने की
- باليۤ Bali
- - एक टुकड़ा वक़्त - -
औराक़ पलटोगे गर माझी-ए-ज़िन्दगी के ,
किसी में सूखे गुलाब तो,
किसी में अश्कों के निशाँ होंगे |
अल्फाज़ एक-एक दर्द को ज़िंदा कर देंगे,
सामने आ खड़े होंगे गुज़रे चहरे सारे ||
एक सिद्दत सी उठेगी लौट जाने की |
फासला कुछ तो ना होगा तेरे और माझी के बीच,
फ़क़त जबल-ए-वक़्त-ए-गुरेजां दरम्यान होंगे |
क्यों फिर तू बारह चाहता है लौटना 'बाली',
जबकि हर मुस्तक्बिल का मुस्तक्बिल है माझी होना ||
हर ज़िन्दगी के मानी, एक टुकड़ा वक़्त में अयां होंगे |||
- باليۤ Bali
किसी में सूखे गुलाब तो,
किसी में अश्कों के निशाँ होंगे |
अल्फाज़ एक-एक दर्द को ज़िंदा कर देंगे,
सामने आ खड़े होंगे गुज़रे चहरे सारे ||
एक सिद्दत सी उठेगी लौट जाने की |
फासला कुछ तो ना होगा तेरे और माझी के बीच,
फ़क़त जबल-ए-वक़्त-ए-गुरेजां दरम्यान होंगे |
क्यों फिर तू बारह चाहता है लौटना 'बाली',
जबकि हर मुस्तक्बिल का मुस्तक्बिल है माझी होना ||
हर ज़िन्दगी के मानी, एक टुकड़ा वक़्त में अयां होंगे |||
- باليۤ Bali
तुझे पता है ?
तुझे पता है, तेरा इंतज़ार तुझ से ज़्यादा हसीं है ?
तुझे पता है, जब तू नहीं होता तो तेरे ख़्याल मुझ से बातें करते हैं ?
तुझे पता है, तेरी आँखों का झुकना तेरे होटों से ज़्यादा बोल जाता है ?
तुझे पता है, तेरी सवाल पूछने की अदा ही हर जवाब है मेरे लिए ?
तुझे पता है, तेरे हंसते हुए बिखर जाना ही मेरे लिए ज़िन्दगी का हासिल है ???
अगर तुझे कुछ भी पता है तेरे बारे में, तो तू जानता है की क्या है तू मेरे लिए !!!
- باليۤ Bali
तुझे पता है, जब तू नहीं होता तो तेरे ख़्याल मुझ से बातें करते हैं ?
तुझे पता है, तेरी आँखों का झुकना तेरे होटों से ज़्यादा बोल जाता है ?
तुझे पता है, तेरी सवाल पूछने की अदा ही हर जवाब है मेरे लिए ?
तुझे पता है, तेरे हंसते हुए बिखर जाना ही मेरे लिए ज़िन्दगी का हासिल है ???
अगर तुझे कुछ भी पता है तेरे बारे में, तो तू जानता है की क्या है तू मेरे लिए !!!
- باليۤ Bali
जिन्दगी माया !
जिन्दगी माया ! जिन्दगी माया !
हासिल है क्या ? माया !
जो छुट गया ! माया !
हम तुझे कुछ कह ना सके !
कह भी दिया तो क्या ? माया !
आरज़ू है, ज़ुस्त्जू है !
आइना है, अक्स भी !
दरम्यां पर फासला है !
आता नज़र क्या? माया !
टूटती है हर नज़र क्यों ?
जुड़ रही है ये ख़लिश क्यों ?
दिल के गहरे में क्या! माया !
दिल के गहरे में एक साया! माया !
- باليۤ Bali
हासिल है क्या ? माया !
जो छुट गया ! माया !
हम तुझे कुछ कह ना सके !
कह भी दिया तो क्या ? माया !
आरज़ू है, ज़ुस्त्जू है !
आइना है, अक्स भी !
दरम्यां पर फासला है !
आता नज़र क्या? माया !
टूटती है हर नज़र क्यों ?
जुड़ रही है ये ख़लिश क्यों ?
दिल के गहरे में क्या! माया !
दिल के गहरे में एक साया! माया !
- باليۤ Bali
खामोशियों का रिश्ता
खामोशियों का जब उसने हमसे रिश्ता बना दिया |
देखिए क्या थे हम और क्या बना दिया ||
हम तो खड़े थे तेरी नज़रों के दरम्यां |
वक़्त ने ना जाने कब फासला बाना दिया ||
और भी होंगी मंजिले राहों में तेरी हज़ार |
इस मकां को तुने हमराह रास्ता बाना दिया ||
मुद्दत बाद वो मिलते हैं तो कहते हैं 'बाली' |
हमने क्या छोड़ा था गम ने क्या बाना दिया ||
- باليۤ Bali
देखिए क्या थे हम और क्या बना दिया ||
हम तो खड़े थे तेरी नज़रों के दरम्यां |
वक़्त ने ना जाने कब फासला बाना दिया ||
और भी होंगी मंजिले राहों में तेरी हज़ार |
इस मकां को तुने हमराह रास्ता बाना दिया ||
मुद्दत बाद वो मिलते हैं तो कहते हैं 'बाली' |
हमने क्या छोड़ा था गम ने क्या बाना दिया ||
- باليۤ Bali
औरों के दर्द-ओ-बयाँ
औरों के दर्द-ओ-बयाँ पे फब्ते कसे थे हमने
जब दिल पे चोट लगी तो अहसास हुआ
- बाली
اوروں کے درد او بياں پے فبتے کسے تھے همنے
جب دل پے چوٹ لگي تو احساس هوا
۔ باليۤ
जब दिल पे चोट लगी तो अहसास हुआ
- बाली
اوروں کے درد او بياں پے فبتے کسے تھے همنے
جب دل پے چوٹ لگي تو احساس هوا
۔ باليۤ
Subscribe to:
Posts (Atom)